
संजय गुप्ता/बलरामपुर@ जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पर शैक्षणिक मदों में खरीदी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। कार्यालय का कहना है कि साइकिल, फर्नीचर, साइंस किट और स्वच्छता सामग्री समेत विभिन्न मदों की खरीदी शासन द्वारा निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत की गई है। ऐसे में जांच पूरी होने और अंतिम निर्णय आने से पहले किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
जिला शिक्षाअधिकारी मनीराम यादव के अनुसार संबंधित खरीदी प्रक्रियाओं में जेम पोर्टल और शासन स्तर की ऑनलाइन व्यवस्था का पालन किया गया। सामग्री की आपूर्ति के बाद संबंधित संस्थाओं से पावती ली गई, भौतिक सत्यापन कराया गया और गुणवत्ता की जांच के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
वर्ष 2025-26 में करीब 4 करोड़ 51 लाख रुपये के भुगतान को लेकर उठ रहे सवालों पर डीईओ का कहना है कि खरीदी और भुगतान से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज जांच दल को उपलब्ध करा दिए गए हैं। वे कलेक्टर के समक्ष भी अभिलेखों के साथ अपना पक्ष रखने को तैयार हैं।
डीईओ का कहना है कि विभागीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया गया है और किसी भी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जांच एजेंसी के समक्ष तथ्य स्पष्ट किए जाएंगे। उनका कहना है कि जांच पूरी होने से पहले आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी प्रतीत होती है।
विभागीय जानकारों का यह भी कहना है कि शिक्षा विभाग में प्रशासनिक निगरानी और ऑनलाइन प्रक्रिया मजबूत होने से खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है। ऐसे में पुराने तौर-तरीकों से प्रभावित लोगों या बिचौलियों के हित प्रभावित होने की स्थिति से भी इन आरोपों को जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल मामले की जांच प्रक्रिया जारी है। ऐसे में वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी। अंतिम निर्णय से पहले किसी भी अधिकारी को दोषी ठहराने के बजाय जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना ही उचित होगा।



