
संजय गुप्ता/रामानुजगंज@ बलरामपुर जिले के त्रिकुंडा जलाशय में जल संसाधन विभाग की घोर लापरवाही का शिकार हुए बुजुर्ग का शव आखिरकार एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय रेस्क्यू टीम ने कई घंटों के कड़े मशक्कत के बाद बरामद कर लिया है। सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर बुजुर्ग को बिना किसी सेफ्टी बेल्ट और लाइफ जैकेट के स्लूज गेट के तेज बहाव में उतार दिया गया था, जिससे वे बह गए थे। शव मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं जल संसाधन संभाग क्रमांक 02 (रामानुजगंज) की आपराधिक अनदेखी को लेकर पूरे इलाके में भारी जनआक्रोश व्यापत हो गया है।
संवेदनहीन बयान पर भड़का गुस्सा, चनान और लुत्ती हादसों के बाद भी नहीं जागे अफसर हादसे के बाद जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) एन.पी. डहरिया के एक बयान ने जलते में घी डालने का काम किया है। हादसे की जिम्मेदारी लेने के बजाय अधिकारी ने संवेदनहीनता दिखाते हुए कह दिया कि “शायद व्यक्ति नशे में था।” इस गैर-जिम्मेदाराना बयान से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।

गौरतलब है कि इससे पहले लुत्ती बांध (5 मौतें) और चनान नदी में ऑपरेटर की मौत जैसे गंभीर हादसे हो चुके हैं, लेकिन कागजी बैठकों में व्यस्त जिम्मेदार अफसरों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा और लगातार मौतों के बावजूद उच्चाधिकारियों पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह: 1 करोड़ मुआवजे और अधिकारी के निलंबन की मांग..
घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह त्रिकुंडा जलाशय पहुंचे और पीड़ित परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली और मनमानी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर हत्या का मामला है। बृहस्पत सिंह ने शासन से पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कर जिम्मेदार अधिकारी को तत्काल निलंबित करने की मांग की है।
इस तीसरी बड़ी वारदात के बाद क्षेत्र में माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है और ग्रामीण प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।


