
संजय गुप्ता/रामानुजगंज@ त्रिकुंडा जलाशय में एक बुजुर्ग व्यक्ति के तेज बहाव में बहने की हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर सिंचाई और जल निकाय प्रबंधन से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर शोक के साथ-साथ भारी आक्रोश का माहौल है, जहां ग्रामीण इसे महज एक हादसा मानने के बजाय प्रशासनिक बदइंतजामी और जल संसाधन विभाग संभाग क्रमांक 02 (रामानुजगंज) की बेपरवाही का सीधा नतीजा बता रहे हैं।

घटना के विवरण के अनुसार: त्रिकुंडा जलाशय का स्लूज गेट अचानक खुल जाने के कारण पानी तेजी से बह रहा था, जिसे रोकने के लिए विभागीय टीम मौके पर पहुंची थी। इसी दौरान बिना किसी सुरक्षा उपकरण और सेफ्टी गियर के ही एक ग्रामीण व्यक्ति को पानी में उतार दिया गया। जैसे ही उसने गेट ठीक करने की कोशिश की, पानी के भीषण और अनियंत्रित बहाव में वह सीधे खिंचता चला गया और अंदर समा गया। घटना के बाद से अब तक उस व्यक्ति का कोई सुराग नहीं लग सका है। फिलहाल एनडीआरएफ (NDRF) और विभागीय टीम मौके पर मौजूद रहकर तलाश और बचाव अभियान चला रही है।
इतने संवेदनशील और जोखिम भरे काम के दौरान सुरक्षा के प्राथमिक मापदंडों की धज्जियां उड़ती साफ नजर आ रही हैं। न तो कर्मचारी और न तो श्रमिक के पास सुरक्षा बेल्ट या लाइफ जैकेट थी और न ही मौके पर कोई आपातकालीन बैकअप व्यवस्था रखी गई थी। धरातल पर नजर आ रही यह बदहाली यह दर्शाती है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही केवल कागजी बैठकों और दफ्तरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मैदान में भी सुरक्षा प्रोटोकॉल को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।

मामले को टालने की कोशिश: कार्यपालन अभियंता का गैर-जिम्मेदाराना बयान..
मामले में जब जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) एन पी डहरिया से बात की गई तो उन्होंने कथित तौर पर यह कहकर मामले को हल्का करने की कोशिश की कि “व्यक्ति शायद शराब के नशे में रहा होगा।”
अधिकारी का यह बयान विभागीय लापरवाही से पल्ला झाड़ने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। लेकिन मूल सवाल यह उठ रहा है कि व्यक्ति नशे में था या नहीं, यह जांच का विषय है—पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह प्रतिबंधित और खतरनाक क्षेत्र तक पहुंचा कैसे? यदि जलाशय के गेट को खोलने या बंद करने की अनुमति केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही है, तो किसी अनधिकृत व्यक्ति को वहां जाने से रोकना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी थी। अगर जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी वहां मौजूद थे, तो उनकी निगरानी में यह व्यक्ति अति-संवेदनशील हिस्से तक कैसे पहुंच गया ?
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग !
अब क्षेत्र में यह तीखे सवाल तैर रहे हैं कि बिना सेफ्टी गियर के इतने तेज बहाव में इंसान को उतरने देने की अनुमति किसने दी और क्या इस खुली लापरवाही पर जिम्मेदार प्रशासनिक अमले पर सीधी कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह मामले की लीपापोती कर इसे दबा दिया जाएगा।
यह पहली बार नहीं है; इससे पहले भी चानन जलाशय में काम के दौरान मशीन के नीचे दबने से ऑपरेटर की मौत हो चुकी है, जबकि लुत्ती बांध टूटने की घटना में पांच लोगों की जान चली गई थी और एक व्यक्ति का अब तक पता नहीं चल सका है। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग केवल हादसों के बाद औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह गया है।
क्षेत्रीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और सुरक्षा इंतजामों में आपराधिक अनदेखी बरतने वाले संबंधित अफसरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।



