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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ जिले में अवैध धान खरीदी के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में धान और कुल 96 वाहनों को जब्त किया गया था.. धान खरीदी और परिवहन पर इस वर्ष काफी हद तक रोक भी लगाई गई, लेकिन जब्त किए गए वाहन अब तक नहीं छोड़े जाने से वाहन मालिकों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई है..
जिला कलेक्ट्रेट में बीते दिन बड़ी संख्या में व्यापारियों और वाहन मालिकों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रशासन से जल्द कार्रवाई करते हुए वाहनों को मुक्त करने की मांग की.. दरअसल 25 फरवरी को इस सभी की पेशी और सुनवाई का दिन था और तिथि बढ़ा कर अब 25 फरवरी कर दी गई है.. उनका कहना है कि धान से लदी गाड़ियां थाना परिसरों में बाहर कई दिनों से खड़ी हैं.. मिलान की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उन्हें छोड़ा नहीं जा रहा है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है..
वाहन मालिकों ने बताया कि अधिकांश गाड़ियां फाइनेंस पर हैं और उनकी मासिक किस्तें लगातार चल रही हैं.. गाड़ियां खड़ी रहने से एक ओर आय का स्रोत बंद हो गया है.. वहीं दूसरी ओर किस्त और बैंक का ब्याज अलग से चुकाना पड़ रहा है.. इससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है.. लंबे समय तक खड़े रहने से वाहनों में तकनीकी खराबी और नुकसान की आशंका भी बढ़ रही है..
व्यापारियों का यह भी आरोप है कि धान से भरी बोरियां खुले में पड़ी हैं.. जो बारिश और नमी के कारण भीग रही हैं और खराब होने की स्थिति में पहुंच गई हैं.. यदि शीघ्र जांच प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो धान की गुणवत्ता प्रभावित होगी.. जिससे और अधिक नुकसान होगा.. साथ ही परिवहन और भाड़े का अतिरिक्त खर्च भी बढ़ता जा रहा है..

बताया जा रहा है कि इस संबंध में पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है.. वर्तमान में सभी 96 गाड़ियों का प्रकरण जिला कलेक्टर के पास लंबित है, जिससे प्रक्रिया में और विलंब हो रहा है..
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में त्वरित जांच और मिलान की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराई जाए.. ताकि जब्त 96 वाहनों को तत्काल मुक्त किया जा सके और प्रभावित वाहन मालिकों व व्यापारियों को राहत मिल सके..
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.. लेकिन व्यापारियों और वाहन मालिकों की निगाहें अब जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी हुई हैं..
