संजय गुप्ता/बलरामपुर@ जिले के राजपुर ग्राम मानपुर स्थित भूमि विवाद मामले में राजस्व न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए खसरा नंबर 228/5, रकबा 0.372 हेक्टेयर भूमि से संबंधित पट्टा को निरस्त कर दिया है। यह भूमि शासकीय अभिलेखों में गौचर/शासकीय मद के अंतर्गत दर्ज पाई गई, जिसके चलते निजी स्वामित्व का दावा अस्वीकार कर दिया गया..
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत प्रकरण में आवेदक द्वारा भूमि पर स्वामित्व और वैध कब्जे का दावा किया गया था, लेकिन जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दावा समर्थन में कोई ठोस और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए.. राजस्व रिकॉर्ड, पुराने खतियान, नामांतरण प्रविष्टियों और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद अदालत ने पाया कि पूर्व में किया गया नामांतरण नियमों के अनुरूप नहीं था..
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित भूमि पर दाखिल-खारिज और नामांतरण की प्रक्रिया संदेहास्पद रही है तथा लंबे समय से भूमि शासकीय उपयोग में दर्ज रही है.. न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि केवल पुराने या अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर शासकीय/गौचर भूमि पर निजी स्वामित्व स्थापित नहीं किया जा सकता..

राजस्व न्यायालय ने अपने आदेश में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भूमि अभिलेखों में आवश्यक सुधार किया जाए और भविष्य में किसी भी प्रकार का अवैध नामांतरण या पट्टा जारी न किया जाए.. साथ ही, शासकीय भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमानुसार कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं..
इस फैसले को जिले में शासकीय भूमि संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस आदेश से अन्य लंबित मामलों में भी राजस्व रिकॉर्ड की सख्ती से जांच का रास्ता साफ हुआ है..
स्थानीय स्तर पर इस निर्णय के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय और गौचर भूमि से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी..
