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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा के ओरसा घाटी में हुई भीषण बस दुर्घटना ने जिन घरों के चिराग बुझा दिए, जिन आँगनों की हँसी हमेशा के लिए खामोश हो गई, उन्हीं टूटे दिलों के बीच आज प्रदेश के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ग्राम पीपरसोत पहुँचे.. मंत्री श्री नेताम जैसे ही गाँव पहुँचे, माहौल गमगीन हो उठा.. रोते-बिलखते परिजन, सूनी आँखें और अपनों की याद में डूबे परिवार… मंत्री ने सभी के बीच बैठकर उनका दर्द सुना, आँसू पोंछे और ढांढस बंधाया.. शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह हादसा केवल कुछ परिवारों का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का दर्द है..
उन्होंने भावुक स्वर में कहा “इस दुर्घटना ने हम सभी को झकझोर कर रख दिया है.. जिन अपनों को आपने खोया है, उनकी जगह कोई नहीं ले सकता.. यह क्षति अपूरणीय है, लेकिन इस दुःख की घड़ी में राज्य सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है”.
गाँव में बातचीत के दौरान जब परिजनों ने अपने प्रियजनों के अंतिम क्रिया-कर्म हेतु वाराणसी (बनारस) जाने की इच्छा जताई, तो मंत्री ने तत्काल संवेदनशील निर्णय लेते हुए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया.. यह सुनकर परिजनों की आँखों में आँसू के बीच एक पल को सुकून भी दिखाई दिया.. ग्रामीणों ने इस दौरान अपनी पीड़ा और समस्याएं भी मंत्री के समक्ष रखीं..
मंत्री श्री नेताम ने मौके पर मौजूद अनुविभागीय अधिकारी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों तक मदद बिना किसी देरी के पहुँचे और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी..उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि घायलों का बेहतर उपचार, नियमित देखभाल और आवश्यक चिकित्सीय सुविधा उनके घर के नजदीक ही सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को और अधिक परेशानी न झेलनी पड़े..

घायलों से मिलकर बढ़ाया हौसला !
इसके पश्चात कृषि मंत्री जिला चिकित्सालय पहुँचे, जहाँ उन्होंने दुर्घटना में घायल लोगों से मुलाकात की.. बिस्तरों पर दर्द से जूझ रहे घायलों का हालचाल पूछते हुए मंत्री भावुक हो उठे.. उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि घायलों के इलाज में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी..
डॉक्टरों को सख्त निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि हर घायल का इलाज सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाए.. इस दौरान मंत्री श्री नेताम ने घायलों को आर्थिक सहायता राशि प्रदान करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की..
ओरसा घाटी की यह दुर्घटना एक ऐसी टीस छोड़ गई है, जिसे भुला पाना आसान नहीं होगा.. लेकिन पीपरसोत के इन टूटे परिवारों को यह भरोसा जरूर मिला कि इस दुःख की घड़ी में वे अकेले नहीं हैं..
