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संजय गुप्ता/राजपुर@ राजपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बघिमा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की हालत बद से बदतर हो चुकी है.. बीते 20 वर्षों से एक निजी सेठ द्वारा राशन दुकान का संचालन किए जाने से ग्रामीण भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं.. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें समय पर चावल नहीं मिलता, और जब मिलता भी है तो निर्धारित मात्रा से कम दिया जाता है.. लगातार अनदेखी और सुनवाई न होने से आक्रोशित ग्रामीण सैकड़ों की संख्या में जिला कलेक्टर कार्यालय बलरामपुर पहुंचे और प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखी.. ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि राशन नहीं मिलने के कारण उनके सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है..

ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक न तो जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई.. इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें राशन के अभाव में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.. कभी अंगूठा का निशान नहीं लगने का बहाना तो कभी राशन काम आने का बहाना बनाकर उनके हक के राशन पर डाका डालने का काम किया जा रहा है.. ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि राशन दुकान को तत्काल सेठ से हटाकर ग्राम पंचायत के सुपुर्द किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और पात्र हितग्राहियों को समय पर पूरा राशन मिल सके.. मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर कलेक्टर ने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो राशन दुकान को ग्राम पंचायत के अधीन कर दिया जाएगा.. उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के तहत जो भी कार्रवाई बनती है, वह की जाएगी..

कई वर्षों तक शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या रसूखदारों को प्रशासनिक संरक्षण मिला हुआ है?
यह मामला सिर्फ राशन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और गरीबों के हक का है.. अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं..
