![]()
मृतक और जेल में बंद किसान के नाम पर ऋण का आरोप, करोड़ों के घोटाले की जांच की मांग !
संजय गुप्ता/रामानुजगंज@ धान खरीदी वर्ष 2025-26 की लंबित भुगतान राशि और किसानों के नाम पर दर्ज कथित फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण प्रकरणों को लेकर किसानों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सामने शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना अब व्यापक जनसमर्थन जुटाने लगा है। आंदोलनकारी किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
किसान नेता नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हैं। किसान कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री विकास दुबे सहित विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने धरना स्थल पर पुलिस बल तैनात किया है।
किसानों का आरोप है कि जिले में करोड़ों रुपये का फर्जी केसीसी ऋण घोटाला हुआ है। उनका कहना है कि कई किसानों के खातों में उनकी जानकारी के बिना ऋण दर्ज कर दिया गया, जिसके चलते धान बिक्री की राशि रोक दी गई है और किसान आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं।

जेल में रहते हुए ऋण आहरण का आरोप !
ग्राम अनिरुद्धपुर निवासी विरेन्द्र सिंह ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2019 और 2021 में उनके खाते से कुल 76 हजार रुपये का केसीसी ऋण आहरित दिखाया गया है, जबकि वे 1 सितंबर 2018 से 22 फरवरी 2023 तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल में निरुद्ध थे। उनका कहना है कि जेल में रहते हुए किसी प्रकार का ऋण लेना या बैंकिंग लेन-देन करना संभव नहीं था, ऐसे में उनके नाम पर ऋण दर्ज होना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
मृतक किसान के नाम पर 3.10 लाख का ऋण
ग्राम ताम्बेश्वर नगर निवासी कृष्णा अधिकारी ने प्रशासन को दिए आवेदन में बताया है कि उनके पिता स्वर्गीय गुरूपद अधिकारी का निधन 23 जनवरी 2021 को हो गया था। इसके बावजूद 17 जुलाई 2021 को उनके नाम पर 3 लाख 10 हजार रुपये का केसीसी ऋण स्वीकृत और आहरित दर्शाया गया है। परिजनों ने इसे गंभीर फर्जीवाड़ा बताते हुए जांच की मांग की है।
किसानों ने उठाए गंभीर सवाल !
आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें किसानों की जानकारी के बिना ऋण दर्ज किए गए हैं। उनका आरोप है कि इन कथित फर्जी ऋणों के कारण धान बिक्री की भुगतान राशि रोकी जा रही है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
किसानों ने बताया कि 9 जून 2026 को मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच तथा लंबित धान भुगतान की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मजबूर होकर उन्हें धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल !
जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री अरविंद दुबे ने कहा कि मृतक व्यक्ति के नाम पर ऋण स्वीकृत होना और जेल में बंद किसान के खाते से ऋण आहरित दिखाया जाना सामान्य त्रुटि नहीं बल्कि गंभीर अनियमितता का संकेत है। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी !
किसान नेता नरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि जल्द किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और कथित फर्जी केसीसी ऋण मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जांच होने पर जिले में करोड़ों रुपये के फर्जी ऋण प्रकरण सामने आ सकते हैं।

फिलहाल किसान दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं और प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरे मामले ने बैंकिंग व्यवस्था, सहकारी संस्थाओं और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें शासन-प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।