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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ बलरामपुर जिले के कलेक्टर कार्यालय परिसर में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है.. जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र में फैली गंदगी न केवल प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है, बल्कि आम नागरिकों और कार्यालय में कार्यरत अधिकारी–कर्मचारियों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई है..
कलेक्टर परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर, गंदगी और अव्यवस्था साफ तौर पर देखी जा सकती है.. हालात इतने खराब हैं कि परिसर में प्रवेश करते ही मोटे मोटे धूल की परत जमी हुई है.. अव्यवस्थित वातावरण प्रशासन की उदासीनता की गवाही देता है..

और तो और, जिला कार्यालय के सामने स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, अशोक स्तंभ एवं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर महीनों से धूल की मोटी परत जमी हुई है.. इन महापुरुषों की प्रतिमाओं की नियमित सफाई तक नहीं होना न केवल लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि उनके सम्मान पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.. यदि सप्ताह में एक बार भी पानी का छिड़काव या साफ-सफाई कर दी जाती, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती..
एक तरफ प्रशासन “स्वच्छता अभियान” को लेकर बड़े-बड़े दावे करता नजर आता है, वहीं दूसरी ओर कलेक्टर परिसर जैसी अति महत्वपूर्ण जगह पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह उपेक्षित है.. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला संयुक्त कार्यालय भवन के निर्माण के बाद से अब तक न तो परिसर की बाउंड्री वॉल पर कभी रंग-रोगन कराया गया और न ही समुचित साफ-सफाई की व्यवस्था की गई..

यह स्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीरता नहीं बरती जा रही है.. सवाल यह उठता है कि जब जिले के प्रशासनिक मुख्यालय की यह हालत है, तो आम सार्वजनिक स्थानों की स्थिति कैसी होगी ?
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे और कब कलेक्टर परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाएगी ?
स्वच्छता केवल नारे और कागजी दावों तक सीमित न रहकर, ज़मीनी स्तर पर भी दिखाई दे.. यही जनता की अपेक्षा है..

