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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ भ्रष्टाचार से जुड़े इस खबर पर अचूक प्रहार ने प्रमुखता से था जिसके बाद एक बार फिर इस असर देखने को मिल रहा है..
ग्राम पंचायत भंवरमाल में पूर्व सरपंच श्रीमती रेवती सिंह (पति – नेपाल सिंह) के कार्यकाल के दौरान स्वीकृत विकास कार्यों की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायतों पर प्रशासन ने संज्ञान लिया है.. कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले की जांच हेतु समिति का गठन कर दिया है..
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत शिकायत में मुख्य रूप से दो कार्यों — हाई स्कूल में अतिरिक्त कक्षा निर्माण तथा हनुमान मंदिर चबूतरा निर्माण — के लिए स्वीकृत शासकीय राशि के उपयोग पर सवाल उठाए गए हैं.. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित कार्यों के लिए राशि आहरित किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ है..

हाई स्कूल अतिरिक्त कक्षा निर्माण का मामला :
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में हाई स्कूल में अतिरिक्त कक्षा निर्माण के लिए स्वीकृत राशि निकाली गई थी। आरोप है कि लगभग दो वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है.. इस संबंध में 27 दिसंबर 2024 को ग्रामीणों एवं पंचगण द्वारा कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर जांच की मांग की गई थी.. शिकायत में यह भी अनुरोध किया गया था कि यदि शासकीय धनराशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए..

हनुमान मंदिर चबूतरा निर्माण पर भी प्रश्न :
इसी प्रकार ग्राम भंवरमाल स्थित हनुमान मंदिर के चबूतरा निर्माण हेतु स्वीकृत राशि के उपयोग को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई है.. आरोप है कि राशि निकासी के बावजूद स्थल पर निर्माण कार्य प्रारंभ या पूर्ण नहीं हुआ.. इस संबंध में भी संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपे जाने की जानकारी दी गई है.. ग्रामीणों ने इस विषय को आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की है..

मंत्री स्तर से निर्देश :
ग्रामीणों का कहना है कि मामले को क्षेत्रीय मंत्री श्री रामविचार नेताम के संज्ञान में भी लाया गया था, जिसके पश्चात 31 दिसंबर 2025 को एसडीएम रामानुजगंज को जांच टीम गठित कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे.. हालांकि, अब तक जांच की प्रगति या निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं..
पुत्र की भूमिका को लेकर भी आरोप :
शिकायत में पूर्व सरपंच के पुत्र नरेंद्र सिंह की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है.. कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मामलों में उनका हस्तक्षेप रहा है तथा प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव डालने का प्रयास किया गया.. साथ ही यह भी आरोप लगाए गए हैं कि संबंधित कार्यों से जुड़ी भुगतान प्रक्रिया में उनकी भूमिका रही हो सकती है.. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है..
जांच समिति का गठन :
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शिकायत की निष्पक्ष जांच के लिए अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है, जिसे निर्धारित अवधि में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी..
प्रशासनिक स्थिति :
वर्तमान में मामले की जांच प्रचलित है और किसी भी प्रकार की अंतिम निष्कर्षात्मक टिप्पणी जांच पूर्ण होने के पश्चात ही संभव होगी.. संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी प्राप्त नहीं हो सकी है..
ग्रामीणों ने अपेक्षा जताई है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी एवं निष्पक्ष होगी तथा यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.. अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी..
