02 नवंबर को हाई स्कूल मैदान में होगा भव्य आयोजन, सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज होंगे मुख्य अतिथि, कलेक्टर ने जिलेवासियों से की शामिल होने की अपील
डेस्क_बलरामपुर@ छत्तीसगढ़ राज्योत्सव की पावन बेला पर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष राज्योत्सव का आयोजन ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ थीम पर किया जा रहा है। 02 नवंबर को दोपहर 02 बजे से बलरामपुर के हाई स्कूल मैदान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश और देश के ख्याति प्राप्त कलाकारों के साथ जिले की स्थानीय प्रतिभाएं भी अपनी कला और संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुतियां देंगी। कार्यक्रम में सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में कसडोल का लोक मंथन दल जनजातीय नृत्य के माध्यम से वनांचल की समृद्ध परंपराओं को जीवंत करेगा। वहीं बिलासपुर की वाईब्रेशन डांस एकेडमी पारंपरिक वेशभूषा में लोक नृत्य की प्रस्तुति देगी। इसके अलावा बनारस का अक्षत कलेक्टिव उप-शास्त्रीय एवं सुगम गायन से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करेगा।
कार्यक्रम में जिले के स्थानीय कलाकारों द्वारा कुल 15 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। विभिन्न विद्यालयों और छात्रावासों के विद्यार्थी छत्तीसगढ़ी स्वागत नृत्य, सुवा नृत्य, छत्तीसगढ़ी रिमिक्स, शिव तांडव, कान्हा नृत्य, सूफी डांस के साथ घूमर, हरियाणवी, अरुणाचली और नेपाली लोक नृत्य की प्रस्तुति देंगे। वहीं भेलवाडीह के पहाड़ी कोरवा कलाकारों द्वारा उड़िया लोक नृत्य और नारी सशक्तिकरण पर आधारित विशेष प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहेगी।

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों को राज्योत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस वर्ष ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ थीम के माध्यम से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव प्रदेश की अस्मिता, संस्कृति और विकास यात्रा का उत्सव है, जिसकी सार्थकता जनभागीदारी से ही पूरी होती है। उन्होंने सभी जिलेवासियों से सपरिवार कार्यक्रम में शामिल होकर स्थानीय कलाकारों का उत्साहवर्धन करने की अपील की।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि ‘अतुल्य बलरामपुर-रामानुजगंज’ की भावना के अनुरूप यह आयोजन जिले की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर है। उन्होंने युवाओं, कला प्रेमियों और आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर राज्योत्सव की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाने का आग्रह किया।