पहली बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ निर्माण, मनरेगा के काम पर उठे सवाल; जिम्मेदारों की भूमिका की जांच की मांग
संजय गुप्ता/बलरामपुर/शंकरगढ़@ सरकार ग्रामीण विकास और जल संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन शंकरगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कमारी और सिलफिली में मनरेगा से कराया गया निर्माण पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। मामला शंकरगढ़ ब्लाक के सिलफिली ग्राम पंचायत फुलझड़ नाला में बना चैकडेम का है।
ग्रामीणों के अनुसार, दोनों पंचायतों में करीब ₹20-20 लाख की लागत से लगभग तीन महीने पहले चेकडेम का निर्माण कराया गया था। लेकिन बारिश शुरू होते ही निर्माण के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए और चेकडेम का एक हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया। निर्माण की मौजूदा स्थिति देखकर सवाल उठ रहा है कि आखिर लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया यह निर्माण तीन महीने भी क्यों नहीं टिक पाया?

पहली बारिश में खुल गई निर्माण की ‘पोल’?
मौके पर चेकडेम के कई हिस्सों में टूट-फूट और क्षति दिखाई देने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। यदि निर्माण निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप हुआ था, बारिश के बहाव में यह यह चैकडैम रेत की ढेर तरह बह गई, भ्रष्टाचार का यह डैम एक सीजन भी नहीं टिक सकी। महज पहली बारिश में इतनी गंभीर क्षति कैसे हुई—यह जांच का विषय है।

अगर सही तरीके से (मजदूरी भुगतान) मास्टर रोल की जांच कर ली जाए तो सारा पोल खुलता नजर आएगा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्माण कार्यों में कथित तौर पर कमीशनखोरी और अनियमितताओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार पता चला है कि कथित तौर पर इस भ्रष्टाचार में ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव, संबंधित पंचायत कई लोगों की भूमिका अहम है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, भुगतान प्रक्रिया, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और स्थल निरीक्षण की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
इस संबंध में जनपद पंचायत शंकरगढ़ के SDO बसिल कुमार मिंज से हमने फोन के माध्यम से बात करने की कोशिश की लेकिन कई बार फोन करने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया और जवाब देना तक मुनासिब नहीं समझा ऐसे में संबंधित जिम्मेदार अधिकारी एसडीओ का कथन नहीं ले सके !

कागजों में मजबूत, जमीन पर कमजोर?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि करीब ₹20 लाख की सरकारी राशि खर्च कर चेकडेम बनाया गया था, तो उसकी गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई? क्या निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया था? क्या भुगतान से पहले निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया? और यदि निर्माण में तकनीकी खामी थी, तो जिम्मेदारी तय किए बिना भुगतान कैसे हुआ?
ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग
स्थानीय शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि ग्राम पंचायत कमारी एवं सिलफिली में मनरेगा से निर्मित चेकडेम की तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच हो, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों और संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी तय की जाए तथा सरकारी राशि के नुकसान की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब सवाल सिर्फ चेकडेम के टूटने का नहीं है। सवाल यह है कि जनता के विकास के लिए स्वीकृत लाखों रुपये की राशि से बना निर्माण पहली बारिश में ही क्यों ढह गया?

इस पूरे मामले में जिला पंचायत के सीईओ आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि अगर जांच में निर्माण में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। क्षतिग्रस्त चेकडेम की गुणवत्ता के साथ पुनर्निर्माण भी सुनिश्चित हो सकता है। फिलहाल मैने इसमें जांच के आदेश दे दिए हैं।
