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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ छत्तीसगढ़ में कृषि आदान (खाद, बीज एवं कीटनाशक) व्यापारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.. छत्तीसगढ़ एग्री इनपुट डीलर्स एसोसिएशन के बैनर तले सोमवार को जिले के व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल करते हुए कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री को अनुरोध पत्र सौंपा.. व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी 12 सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा..
एसोसिएशन का कहना है कि वह राज्य के लगभग 5 लाख कृषि आदान व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो पिछले 10 वर्षों से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं.. इसके बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उनकी मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे व्यापारियों में भारी नाराजगी है..
व्यापारियों की प्रमुख मांगों में उर्वरक कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन लिंकिंग को अपराध घोषित करना, डीलरों को सीधे बिक्री केंद्र तक खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करना और उर्वरकों पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8 प्रतिशत करना शामिल है.. उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में रेल-हेड से खाद उठाने में प्रति बैग 40 से 50 रुपये तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है..
इसके अलावा ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए पोर्टल की अनिवार्यता समाप्त करने, अवैध बीजों की बिक्री पर रोक लगाने, सीलबंद पैकिंग में गुणवत्ता खराब मिलने पर विक्रेता को जिम्मेदार न ठहराने और कंपनियों द्वारा एक्सपायर्ड स्टॉक को वापस लेने की कानूनी बाध्यता तय करने की मांग भी उठाई गई है..
एसोसिएशन ने नए बीज अधिनियम और प्रस्तावित कीटनाशक विधेयक 2025 में डीलरों को ‘प्रथम पक्ष’ बनाने के प्रावधान में ढील देने, लाइसेंस निलंबन की स्थिति में 21 दिनों के भीतर स्वतः बहाली, हर साल प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोड़ने की अनिवार्यता समाप्त करने तथा दोहरी लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने की मांग भी रखी है..
व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि एक माह के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन बंद के लिए बाध्य होंगे.. इससे कृषि कार्य प्रभावित होंगे और किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित अधिकारियों की होगी..