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संजय गुप्ता/बलरामपुर (चांदो)@ शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल परिसर में जब बच्चों के अधिकार कूड़े के ढेर में पड़े मिलें, तो सवाल सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता का होता है.. बलरामपुर जिले के चांदो स्थित एक शासकीय स्कूल परिसर में बड़ी संख्या में स्कूल गणवेश कचरे के ढेर में फेंके हुए मिले हैं—वो भी ऐसे नहीं, बल्कि बंडलों में, मानो बच्चों तक पहुंचने से पहले ही इनका ‘अंतिम संस्कार’ कर दिया गया हो..
जानकारी के मुताबिक ये गणवेश सत्र 2024-25 में छात्रों को वितरण के लिए मंगाए गए थे.. लेकिन अफसरों और जिम्मेदार कर्मचारियों की घोर लापरवाही के चलते ये ड्रेस कभी बच्चों तक पहुंच ही नहीं सके.. नतीजा—जहां जरूरतमंद बच्चे बिना यूनिफॉर्म के स्कूल जाते रहे होंगे, वहीं उनका हक कचरे में सड़ता रहा..
यह पहला मामला नहीं है जब बलरामपुर का शिक्षा विभाग ऐसी शर्मनाक स्थिति में पकड़ा गया हो.. इससे पहले भी गणवेश वितरण में गड़बड़ी को लेकर कई मामले सामने आ चुके हैं, यहां तक कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी पर कार्रवाई और निलंबन तक की नौबत आ चुकी है.. बावजूद इसके, हालात जस के तस बने हुए हैं..
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है? संकुल प्रभारियों को सौंपे गए गणवेश आखिर कूड़े तक कैसे पहुंच गए? क्या वितरण की मॉनिटरिंग सिर्फ कागजों में ही होती रही?
फिलहाल जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच कराने की बात कही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये ड्रेस कब और किन परिस्थितियों में यहां पहुंचे.. लेकिन जब तक जवाब सामने आएंगे, तब तक एक कड़वी सच्चाई सबके सामने है..
यह सिर्फ कपड़ों का ढेर नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का ढेर है… जिसमें बच्चों के सपने दबे पड़े हैं !