
संजय गुप्ता/बलरामपुर@ शहर की स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त रखने और नागरिकों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने का दावा करने वाली नगर पालिका परिषद की हकीकत जिला अस्पताल के बाहर पहुंचते ही उजागर हो जाती है। जिले का सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान रात होते ही अंधेरे में डूब जाता है, पिछले कई दिनों से हॉस्पिटल रोड की सारी स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हुई है। ऐसा लगता है मानो इस गंभीर समस्या से नगर पालिका ने आंखें पूरी तरह से मूंद ली हों ?
जिला अस्पताल इलाज का केंद्र है, डर और अंधेरे का नहीं। नगर पालिका परिषद को तत्काल बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को चालू कर पूरे मार्ग को रोशन करना चाहिए। क्योंकि यदि भविष्य में अंधेरे की वजह से कोई दुर्घटना, सांप के काटने की घटना या असामाजिक तत्वों से जुड़ी वारदात होने का चिंता भी होती है, तो जनता सबसे पहले नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाएगी।
बरसात के इस मौसम में स्थिति और भी भयावह हो गई है। सड़क किनारे झाड़ियों और नालों के कारण सांप और अन्य जहरीले जीव निकलने का खतरा बना रहता है। अंधेरे की वजह से राहगीरों को यह भी पता नहीं चल पाता कि उनके कदम किस ओर पड़ रहे हैं। यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे का फायदा असामाजिक तत्व भी उठा सकते हैं। सुनसान और अंधेरे स्थान अक्सर नशे के कारोबारियों और असामाजिक गतिविधियों के लिए मुफीद साबित होते हैं। जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र के आसपास यदि ऐसी स्थिति बनी रहती है तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी है।
सबसे बड़ा सवाल नगर पालिका परिषद से है। आखिर शहर के सबसे महत्वपूर्ण संस्थान तक जाने वाले मार्ग की स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त कराने में इतनी उदासीनता क्यों? क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर विकास के दावे करेंगे या जमीन पर भी अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?
विडंबना यह भी है कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी, सिविल सर्जन, डॉक्टर और अन्य कर्मचारी भी प्रतिदिन इसी मार्ग से गुजरते हैं। जनप्रतिनिधियों की आवाजाही भी इसी सड़क से होती है, फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि जब तक कोई बड़ा हादसा, दुर्घटना या आपराधिक घटना नहीं हो जाती, तब तक जिम्मेदारों की नींद नहीं खुलेगी।

बीते लगभग 20 दिनों से जिला अस्पताल रोड अंधेरे में डूबा हुआ है आश्चर्य की बात है, इसी रोड पर सीएमओ नगर पालिका कार्यालय भी मौजूद है, और रात में अक्सर इस सड़क से गुजरते भी होंगे लेकिन लेकिन ना तो किसी जनप्रतिनिधि ने इस पर ध्यान दिया और ना ही जिम्मेदारों ने..
इस विषय में जब हमने नगर पालिका परिषद के सीएमओ से जानने की कोशिश की तो उन्होंने अभिज्ञता जाहिर की और कहां की मैं चेक करवाता हूं।



