कमर तक गड्ढे, अब भरने का काम शुरू — देर आए, दुरुस्त आए!
हरकीरत सिंह(बॉबी)सीतापुर@ सीतापुर शहर और आसपास की बदहाल सड़कों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और ‘अचूक प्रहार’ की खबरों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। लंबे समय से गड्ढों और जर्जर सड़कों की समस्या से जूझ रहे लोगों को अब थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जिन सड़कों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बने हुए थे, अब उनमें मिट्टी, गिट्टी और अन्य सामग्री डालकर गड्ढे भरने का काम शुरू कर दिया गया है।
हालांकि यह सवाल अभी भी बरकरार है कि आखिर यह काम ‘अचूक प्रहार’ की लगातार खबरों और सवालों के बाद शुरू हुआ है या प्रशासन ने खुद ही सड़कों की बदहाली को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है? वजह जो भी हो, फिलहाल आम लोगों के लिए राहत की बात यही है कि लंबे समय से परेशानी झेल रहे मार्गों पर कम से कम मरम्मत की शुरुआत तो हुई है।
गड्ढों ने बढ़ाई थी लोगों की परेशानी
सीतापुर की कई सड़कों की स्थिति पिछले काफी समय से चिंताजनक बनी हुई थी। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण वाहन चालकों को बेहद सावधानी से आवागमन करना पड़ रहा था। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना भी मुश्किल हो जाता था।
कई स्थानों पर स्थिति ऐसी बन गई थी कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता था। वहीं, बड़े वाहनों की आवाजाही के दौरान सड़क की हालत और बिगड़ती जा रही थी। स्थानीय लोगों का कहना था कि सड़क पर गड्ढे लगातार बढ़ते गए, लेकिन समय रहते उनकी मरम्मत नहीं की गई।
अब शुरू हुआ गड्ढे भरने का काम
लगातार सवाल उठने और सड़कों की स्थिति सामने आने के बाद अब संबंधित मार्गों पर गड्ढे भरने का काम शुरू किया गया है। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या केवल गड्ढों में सामग्री डालकर उन्हें भर देना ही सड़क मरम्मत का स्थायी समाधान है?
अगर कुछ दिनों की बारिश या भारी वाहनों की आवाजाही के बाद यही गड्ढे दोबारा उभर आते हैं, तो फिर इस पूरी कवायद का क्या फायदा?
‘अचूक प्रहार’ का असर या प्रशासन की देर से जागी नींद?
सड़कों की बदहाली को लेकर ‘अचूक प्रहार’ द्वारा लगातार खबरों के माध्यम से सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में अब जब गड्ढे भरने का काम शुरू हुआ है, तो लोगों के बीच यह चर्चा स्वाभाविक है कि क्या लगातार उठाई गई आवाज आखिरकार प्रशासन तक पहुंची है?
या फिर यह महज संयोग है कि लंबे इंतजार के बाद प्रशासन ने सड़कों की सुध लेना शुरू किया?
कारण चाहे जो भी हो, जनता के लिए मुद्दा श्रेय का नहीं बल्कि राहत और बेहतर सड़क का है।
गड्ढे भरना शुरुआत, स्थायी मरम्मत जरूरी
फिलहाल गड्ढे भरने से वाहन चालकों को कुछ राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन सीतापुर की सड़क समस्या का स्थायी समाधान केवल गड्ढे भरने से संभव नहीं है। जरूरत इस बात की है कि सड़कों की तकनीकी स्थिति का आकलन कर उनकी गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ मरम्मत कराई जाए।
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति न हो। सड़क की गुणवत्ता, इस्तेमाल की जा रही सामग्री और निर्माण कार्य की निगरानी पर भी जिम्मेदार अधिकारियों को ध्यान देना होगा।
क्योंकि जनता ने विकास के नाम पर सिर्फ गड्ढे नहीं मांगे थे। लोगों की अपेक्षा ऐसी सड़कों की है, जिन पर वे सुरक्षित और सुगम तरीके से आवागमन कर सकें।
जनता की नजर अब काम की गुणवत्ता पर
गड्ढे भरने का काम शुरू होने के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि यह मरम्मत कितने दिनों तक टिकती है। अगर मरम्मत के बाद सड़क फिर से उसी हालत में पहुंच जाती है, तो सवाल उठना तय है।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है—
देर आए, दुरुस्त आए।
कुछ न होने से कुछ होना बेहतर है। लेकिन प्रशासन को यह भी याद रखना होगा कि गड्ढे भरना समाधान की शुरुआत है, उपलब्धि का अंत नहीं।
अब जनता सिर्फ यह देखना चाहती है कि सीतापुर की सड़कें वास्तव में सुधरती हैं या फिर कुछ समय बाद वही पुराने गड्ढे एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते नजर आएंगे।