डेस्क_अंबिकापुर@ बारिश से पहले सड़कों की ठोस मरम्मत नहीं होने का खामियाजा अब अंबिकापुर के शहरवासियों और राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। शहर से लेकर राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों तक सड़कों की हालत बदहाल है। जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे बारिश के पानी और कीचड़ से भर गए हैं, जिससे राहगीरों को रोजाना परेशानी और जोखिम के बीच सफर करना पड़ रहा है।
सबसे खराब स्थिति अंबिकापुर-मनेंद्रगढ़ मार्ग की बनी हुई है। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क के गड्ढे और गहरे हो गए हैं और इनमें जमा पानी ने पूरी सड़क को कीचड़ में तब्दील कर दिया है। संभाग मुख्यालय की सड़कों की यह तस्वीर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है।
कीचड़ में डांस कर जताया विरोध
सड़कों की बदहाली के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रविवार शाम अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। रावत रेसिडेंसी कॉलोनी के सामने जर्जर सड़क पर पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रसिद्ध लोकगीत ‘हाय रे सरगुजा नाचे’ पर कीचड़ के बीच जमकर डांस किया।
प्रदर्शनकारियों ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जब जिम्मेदार और नेता मस्त हैं तो हम भी मस्त क्यों न रहें। उन्होंने कहा कि जनता को जब गड्ढों और कीचड़ भरी सड़कों पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, तो इसी समस्या को अपने अंदाज में सामने लाकर सरकार और जिम्मेदार विभाग का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है।
प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता सुजान बिंद, राजेंद्र बहादुर सिंह, अंकुर सिन्हा, संजय ठाकुर सहित अन्य लोग शामिल रहे।
पहले कीचड़ में नहाकर किया था प्रदर्शन
गौरतलब है कि इसी मार्ग की बदहाली को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता करीब एक सप्ताह पहले भी विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने सड़क के गड्ढों में भरे कीचड़युक्त पानी में स्नान कर अनोखे तरीके से विरोध जताया था। इसके बाद मार्ग पर बोल्डर डालकर अस्थायी मरम्मत कराई गई थी, लेकिन बारिश के बीच सड़क की समस्या फिर गंभीर होती नजर आ रही है।
फोरलेन का इंतजार, कब सुधरेगी सड़क?
अंबिकापुर-मनेंद्रगढ़ एनएच को गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक फोरलेन बनाए जाने की योजना है। वहीं भारतमाता चौक से दरिमा मोड़ तक सड़क की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है। जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की ओर से सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत होने तथा बारिश समाप्त होने के बाद निर्माण शुरू किए जाने की बात कही जा रही है।
फिलहाल सवाल यही है कि बारिश खत्म होने और नई सड़क बनने तक शहरवासियों को इन गड्ढों, कीचड़ और जोखिम भरे सफर से कब तक गुजरना पड़ेगा? सड़कों की बदहाली अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन और जिम्मेदार व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुकी है।