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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला अस्पताल में हुई एक महिला की मौत का मामला अब नया मोड़ ले चुका है.. करीब 15 दिन पहले अस्पताल की टेरेस से कूदने वाली महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी.. अब मृतिका के परिजन अस्थि कलश लेकर बलरामपुर से रायपुर तक लगभग 450 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़े हैं.. परिजन अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए 15 लाख रुपये मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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▪️ घटना वाली रात आखिर हुआ क्या था?
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बताया जा रहा है कि 30 अप्रैल की दरमियानी रात महिला जिला अस्पताल में भर्ती थी।
घटना के समय परिजन भी अस्पताल परिसर में मौजूद थे, लेकिन देर रात सभी के सो जाने के बाद महिला अकेले अस्पताल की टेरेस तक पहुंच गई।
आरोप है कि टेरेस का गेट खुला था और वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। इसी दौरान महिला ने टेरेस से छलांग लगा दी।
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर हालत में महिला को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया, जहां इलाज के दौरान अगले दिन उसकी मौत हो गई।

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▪️ परिजनों का आरोप — “लापरवाही ने ली जान”
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मृतिका के परिजनों का कहना है कि अगर अस्पताल प्रशासन सतर्क रहता तो महिला टेरेस तक पहुंच ही नहीं पाती।
परिजनों के मुताबिक —
टेरेस का दरवाजा बंद नहीं था
सुरक्षा गार्ड की निगरानी कमजोर थी
अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था लचर थी
इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर परिजन अब 15 लाख रुपये मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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▪️ अस्पताल प्रबंधन ने क्या कहा?
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जिला अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि —
यह आत्महत्या का मामला है
पुलिस जांच और विभागीय जांच पूरी हो चुकी है
घटना वाली रात का सीसीटीवी फुटेज मौजूद है
फुटेज में महिला अकेले रेलिंग पार करते दिखाई दे रही है
सिविल सर्जन का कहना है कि कुछ लोग इस मामले को अलग दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।
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▪️ अब सड़क पर उतरे परिजन
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मामले ने अब भावनात्मक और राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है।
मृतिका के परिजन अस्थि कलश लेकर बलरामपुर से रायपुर तक पैदल मार्च पर निकल चुके हैं।
परिजनों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाएंगे।
इस यात्रा को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और लोगों के बीच अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

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▪️ सबसे बड़ा सवाल?
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• इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में वाकई चूक हुई थी?
• अगर टेरेस तक पहुंच आसान थी तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
• और क्या शासन परिजनों की मांगों पर कोई बड़ा फैसला लेगा?
इस पूरे मामले में जब हमारी अचूक प्रहार की टीम मौके पर पहुंची और बारीकी से एक-एक पहलू को देखा समझा और जाना तो यह समझ में आया कि महिला अपनी मर्जी से रात में टेरिस के ऊपर बने बेरिकेट को क्रॉस कर आखिरी अंतिम दीवार तक पहुंची जहां से उसे महिला ने आत्महत्या करने जैसे वारदात को अंजाम दिया.. हमारी तहकीकात में यह भी समझ में आया कि तथा घटना की रात मां और बेटी के बीच कुछ अनबन (झगड़ा) भी हुई थी.. उसी अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती भी मरीज इसका स्वच्छ दर्शी है.. इसमें एक और गौर करने वाली बात है कि जब उसे वार्ड में मरीज के अटेंडर के रूप में परिजन मौजूद थे तो उन्होंने उसका ध्यान क्यों नहीं रखा ?

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▪️ निष्कर्ष
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एक तरफ परिजन इसे अस्पताल की लापरवाही बता रहे हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन आत्महत्या का मामला कहकर आरोपों को खारिज कर रहा है।
लेकिन अस्थि कलश लेकर 450 किलोमीटर की पैदल यात्रा ने इस मामले को अब सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था पर उठते सवालों का मुद्दा बना दिया है।