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डेस्क_अचूक प्रहार@ अंबिकापुर के नामना रिंग रोड में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां कुछ स्थानीय लोग हाथों में फावड़ा और सब्बल लेकर सड़क के डिवाइडर को तोड़ते नजर आए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह पूरा काम खुलेआम, बिना किसी प्रशासनिक अनुमति और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के किया गया। मानो सड़क और कानून दोनों ही इन लोगों की निजी संपत्ति हों।
बताया जा रहा है कि रिंग रोड में पहले एक कट छोड़ा गया था ताकि लोग सड़क पार कर सकें, लेकिन वहां लगातार दुर्घटनाएं होने लगीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक व्यक्ति ने कलेक्टर से शिकायत की, जिसके बाद प्रशासन ने जनहित में उस क्रॉसिंग को बंद करने का आदेश दे दिया।

लेकिन प्रशासनिक आदेश कुछ लोगों को रास नहीं आया। अगले ही दिन कुछ पुरुष और महिलाएं सड़क पर उतर आए और खुद ही डिवाइडर तोड़ने लगे। सवाल यह उठता है कि आखिर किस अधिकार से ये लोग सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने लगे? क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?
हैरानी की बात यह भी है कि इस पूरे घटनाक्रम में जो शख्स सबसे आगे नजर आ रहा है, वह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि शिक्षा विभाग से जुड़ा एक अधिकारी बताया जा रहा है जिसका नाम श्रीमान संतोष है, जानकारी के मुताबिक, यह महोदय पूर्व में सेजस केशव पुर में प्रभारी प्राचार्य रह चुके हैं और वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय अंबिकापुर में APC के पद पर कार्यरत है। मूल रूप से वे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोनगरा, विकासखंड प्रतापपुर, जिला सूरजपुर में व्याख्याता (गणित) के पद पर पदस्थ पर थे।
सूत्रों की मानें तो उक्त अधिकारी का नाम पहले भी कई विवादित मामलों में सामने आ चुका है। गत वर्ष भी उन पर कई गंभीर आरोप लगे थे, लेकिन आज तक किसी मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी। आरोप है कि हर बार मामला दबा दिया गया। इतना ही नहीं इससे पूर्व एक बार पीबीसी के आठ शौचालय में आगजनी की घटना भी करने का आरोप इन महोदय पर लग चुका है पर उसे पर भी अभी तक कोई कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जा सकी है,
फिलहाल प्रशासन ने अगले ही दिन टूटे हुए डिवाइडर को दोबारा बंद करवा दिया, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है — आखिर सरकारी व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर कार्रवाई कब होगी? या फिर रसूख और पहुंच के आगे नियम-कायदे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे..?