कुछ माह पहले हुआ था पेंच रिपेयर, बारिश में फिर उखड़ी सड़क — गड्ढों में तब्दील हुआ महत्वपूर्ण मार्ग !
संजय गुप्ता/बलरामपुर@ जिले में बारिश ने जहां जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं सड़कों की बदहाली ने PWD की कार्यप्रणाली और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हालात इतने खराब हैं कि जिस सड़क पर कुछ महीने पहले ही पेंच रिपेयर के नाम पर काम कराया गया था, वही सड़क अब जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
शिक्षक दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे कृषि मंत्री रामविचार नेताम जब अंबिकापुर से प्रतापपुर होते हुए सेमरसोत एनएच-343 को जोड़ने वाली मुख्य PWD सड़क से गुजरे, तो सड़क की बदहाली देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, उनमें भरा बारिश का पानी और उखड़ी हुई सड़क की हालत देखकर मंत्री ने मौके से ही कलेक्टर से चर्चा की और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

सवाल सिर्फ गड्ढों का नहीं, काम की गुणवत्ता का भी है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सड़क की मरम्मत कुछ महीने पहले ही हुई थी, तो फिर बारिश आते ही सड़क दोबारा क्यों उखड़ गई?
क्या मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई?
क्या पेंच रिपेयर में गुणवत्ता के मानकों का पालन हुआ?
और अगर काम गुणवत्तापूर्ण था, तो इतने कम समय में सड़क फिर गड्ढों में कैसे बदल गई?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क पर कराया गया पेंच रिपेयर टिकाऊ साबित नहीं हुआ। बारिश शुरू होते ही सड़क फिर टूटने लगी और देखते ही देखते गड्ढे गहरे होते चले गए।
पानी में छिपे गड्ढे, हर सफर बन रहा खतरे का सफर
इस सड़क की सबसे खतरनाक तस्वीर बारिश के दौरान सामने आ रही है। गहरे गड्ढों में पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को उनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा तक नहीं लग पाता।
दिन में तो चालक किसी तरह गड्ढों से बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात में यही गड्ढे जानलेवा साबित हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो रात में इस सड़क से गुजरना अब जान हथेली पर रखकर चलने जैसा हो गया है। कभी भी पानी से भरे किसी गड्ढे में वाहन फंस सकता है या अनियंत्रित होकर दुर्घटना का शिकार हो सकता है।

NH-343 का काम जारी, ऐसे में PWD सड़क बनी लाइफलाइन
बलरामपुर-अंबिकापुर NH-343 का निर्माण कार्य जारी होने के कारण यह PWD मार्ग मुख्यालय से अंबिकापुर की ओर आने-जाने वाले लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
लेकिन जिस सड़क को इस समय लोगों के लिए राहत का रास्ता होना चाहिए था, वही गड्ढों और कीचड़ का रास्ता बन चुकी है।
एक तरफ राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण, दूसरी तरफ वैकल्पिक मार्ग की बदहाली—ऐसे में आम जनता आखिर जाए तो जाए कहां?
मंत्री के गुजरने से पहले तक जिम्मेदारों को क्यों नहीं दिखे गड्ढे?
सड़क की हालत को लेकर सबसे बड़ा सवाल सिस्टम की निगरानी पर है।
क्या विभागीय अधिकारियों को सड़क की यह बदहाली दिखाई नहीं दे रही थी?
क्या सड़क की नियमित जांच नहीं होती?
क्या बारिश से पहले मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच की गई थी?
और अगर जांच हुई थी, तो फिर कुछ ही महीनों में सड़क की यह हालत कैसे हो गई?
अब मंत्री के निर्देश के बाद इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी हो गया है।

मंत्री के निर्देश के बाद अब कार्रवाई का इंतजार
कृषि मंत्री रामविचार नेताम की नाराजगी के बाद प्रशासन ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और सड़क की जल्द मरम्मत के निर्देश दिए हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि PWD सिर्फ गड्ढे भरने की औपचारिकता निभाता है या वास्तव में सड़क की स्थायी मरम्मत करता है।
साथ ही यह भी देखना अहम होगा कि पहले कराए गए पेंच रिपेयर की गुणवत्ता की जांच होती है या नहीं और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाती है या मामला फिर फाइलों में दबकर रह जाता है।

प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से दौड़ रहे भारी वाहन, आखिर किसकी शह पर?
आपको बता दें कि प्रतापपुर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित होने के बावजूद रोजाना बड़ी संख्या में ट्रक और भारी वाहन इस सड़क से गुजर रहे हैं। यही वजह है कि पहले से जर्जर सड़क अब भारी वाहनों के दबाव में और भी बदहाल होती जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मार्ग प्रतिबंधित है, तो ये भारी वाहन आखिर सड़क पर पहुंच कैसे रहे हैं? हैरानी की बात यह है कि इन वाहनों को पुलिस चौकी से होकर ही गुजरना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पुलिस की नजरों से कैसे बच रही है?
स्थानीय स्तर पर पुलिस संरक्षण और कथित लेन-देन के गंभीर आरोप भी सामने आ रहे हैं। आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद कुछ भारी वाहनों को कथित रूप से पैसे लेकर आगे जाने दिया जाता है।

यदि इन आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो यह सिर्फ सड़क की बदहाली का मामला नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल है।
अब सवाल सीधा है—प्रतिबंधित सड़क पर भारी वाहन आखिर किसके इशारे पर दौड़ रहे हैं? पुलिस चौकी के सामने से गुजरने वाले इन वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? और अगर कार्रवाई नहीं हो रही, तो इसकी वजह क्या है?
फिलहाल सड़क पर बने गड्ढे सिर्फ राहगीरों की परेशानी नहीं, बल्कि PWD के कामकाज पर खुलेआम सवालिया निशान बन चुके हैं।
मंत्री की नजर पड़ी तो कार्रवाई के निर्देश मिल गए, लेकिन सवाल यह है—जनता की आवाज और सड़क के गड्ढे जिम्मेदारों को कब दिखाई देते?