NHM के जांच संबंधी पत्र पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ की आपत्ति, 8-9 माह से लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग!
डेस्क_रायपुर@ छत्तीसगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के बीच प्रोत्साहन राशि की जांच को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने NHM राज्य कार्यालय द्वारा 9 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे निरस्त करने अथवा आवश्यक संशोधन के साथ दोबारा जारी करने की मांग की है। वहीं, पिछले 8 से 9 माह से लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं होने से नाराज संघ ने 15 अक्टूबर से प्रदेशभर में सभी प्रकार की ऑनलाइन रिपोर्टिंग का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने की घोषणा की है।
संघ के अनुसार, NHM के अतिरिक्त संचालक द्वारा जारी पत्र क्रमांक NHM-HR/ESTB/18786/2026/2502 में प्रोत्साहन राशि से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच के साथ मुख्यालय में निवास, समय पर ड्यूटी पर उपस्थिति, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, 50 प्रतिशत से कम ऑनलाइन उपस्थिति, ऑनलाइन कार्यों में लापरवाही तथा उप स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव की संख्या शून्य होने जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
संघ ने आरोप लगाया है कि इन अलग-अलग प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य सेवा संबंधी विषयों को प्रोत्साहन राशि की जांच से जोड़कर CHO संवर्ग को एकतरफा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी जांच निर्धारित मानकों, संबंधित अभिलेखों और वास्तविक कार्य निष्पादन के आधार पर होनी चाहिए।

8-9 माह से प्रोत्साहन राशि लंबित होने का आरोप
संघ ने दावा किया है कि प्रोत्साहन राशि के भुगतान के संबंध में विभागीय स्तर पर निर्देश जारी होने के बावजूद प्रदेश के अधिकांश जिलों में पिछले 8 से 9 माह से भुगतान लंबित है। ऐसे में संगठन ने पहले लंबित भुगतान सुनिश्चित करने और फिर जांच प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने की मांग उठाई है।
संघ का कहना है कि वह किसी भी वास्तविक अनियमितता की निष्पक्ष जांच या नियमानुसार कार्रवाई का विरोध नहीं करता। हालांकि, किसी भी CHO के विरुद्ध कार्रवाई से पहले संबंधित अभिलेखों की समीक्षा और संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
ऑनलाइन रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल CHO पर डालने का विरोध
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में कई स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका होती है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव और ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसे कार्य निर्धारित कार्यविभाजन के अनुसार किए जाते हैं।
ऐसे में किसी संस्थान में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने या ऑनलाइन रिपोर्टिंग में कमी होने पर केवल CHO को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। संघ ने मांग की है कि संबंधित कर्मचारियों की भूमिका, उपलब्ध मानव संसाधन, स्वास्थ्य सुविधाओं, तकनीकी समस्याओं और वास्तविक कार्य अभिलेखों की समीक्षा के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाए।
10 दिन में मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन
संघ ने बताया कि अपनी विभिन्न मांगों और आपत्तियों को लेकर विभागीय अधिकारियों को पहले भी पत्र भेजे गए हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से CHO संवर्ग में नाराजगी है। संगठन ने 9 अक्टूबर को जारी पत्र की समीक्षा, जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग की है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्व में प्रस्तुत मांगों का 10 दिनों के भीतर निराकरण नहीं किया जाता है, तो अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार से प्रदेश के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा सभी प्रकार की ऑनलाइन रिपोर्टिंग का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है।
जिला स्तर पर भी दी जाएगी आंदोलन की सूचना
संघ ने अपने जिला पदाधिकारियों को संबंधित जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और खंड चिकित्सा अधिकारियों को आंदोलनात्मक कार्यक्रम की लिखित सूचना देने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रशासन को संगठन की मांगों और प्रस्तावित आंदोलन से अवगत कराया जा सके।
छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने शासन और प्रशासन से निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी मांगों का निराकरण करने की अपील की है। संघ ने स्पष्ट किया है कि वह निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई के पक्ष में है, लेकिन किसी एक संवर्ग को लक्षित करने वाली प्रक्रिया स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब देखना होगा कि NHM प्रशासन संघ की मांगों पर क्या कदम उठाता है और 15 अक्टूबर से प्रस्तावित ऑनलाइन रिपोर्टिंग बहिष्कार को टालने के लिए कोई पहल की जाती है या नहीं।