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दिन-रात हो रही अवैध खुदाई, प्रशासन बना मूकदर्शक
• रोज 200 से ज्यादा ट्रक-ट्रैक्टर से रेत की ढुलाई
• पुल के पीलर तक खोद डाली रेत, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
• राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
संजय गुप्ता/ बलरामपुर@ जिले में अवैध रेत खनन का खेल अब खुलेआम प्रशासन को चुनौती देने लगा है.. राजपुर जनपद के ग्राम पंचायत धंधापुर अंतर्गत छिंदियाडांड़ स्थित महान नदी इन दिनों रेत माफियाओं के कब्जे में नजर आ रही है.. हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि नदी पर बने करोड़ों रुपए के पुल के पीलर की नींव तक खोद डाली गई है.. बलरामपुर और सूरजपुर जिला के सीमा से लगा है क्षेत्र यह लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं..
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां प्रतिदिन 200 से ज्यादा ट्रक और ट्रैक्टर अवैध रेत लेकर निकलते हैं.. सुबह अंधेरा रहते शुरू होने वाला यह खेल देर शाम तक चलता है, लेकिन न राजस्व अमला दिखाई देता है, न खनिज विभाग और न ही पुलिस की कोई सख्ती..

पुल के नीचे से निकाल ली रेत, मौत को न्योता
छिंदियाडांड़ में महान नदी पर लगभग 10 करोड़ रुपए की लागत से बने पुल के नीचे जिस तरह से रेत निकाली गई है, उसने पूरे पुल की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं.. पुल के पीलर की नींव तक खुल चुकी है और स्थानीय लोगों के मुताबिक भारी वाहन गुजरने पर पीलर हिलते हुए महसूस होते हैं..
यदि समय रहते अवैध उत्खनन नहीं रोका गया, तो यह पुल कभी भी भरभराकर गिर सकता है और बड़ी जनहानि हो सकती है.. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहा है ?

: रोज निकल रही “सोने” जैसी रेत
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक महान नदी से रोजाना 200 से अधिक वाहन रेत लेकर निकल रहे हैं.. यह अवैध रेत अम्बिकापुर, बरियों, आरा, धौरपुर, लुण्ड्रा समेत कई इलाकों तक पहुंचाई जा रही है..
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर हो रहे अवैध परिवहन के बावजूद किसी भी विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई.. इससे साफ है कि रेत माफियाओं के हौसले किसी बड़े संरक्षण के दम पर बुलंद हैं..

: गर्मी शुरू, माफिया सक्रिय
हर साल गर्मी शुरू होते ही नदी का जलस्तर कम होता है और रेत माफिया सक्रिय हो जाते हैं.. भोर के 4-5 बजे से ही जेसीबी, ट्रैक्टर और मजदूर नदी में उतर जाते हैं..
दिनभर चलने वाले इस खेल को देखने के बाद भी जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है.. ऐसा लगता है मानो अवैध खनन करने वालों को कानून का कोई डर ही नहीं बचा..

: पुलिस-राजस्व की “मिलीभगत” की चर्चा
स्थानीय लोगों के बीच खुलेआम चर्चा है कि इस अवैध कारोबार को राजस्व विभाग और पुलिस का संरक्षण प्राप्त है.. अंबिकापुर की ओर जाने वाले रेत से भरे ट्रकों को खड़गंवा चौकी में कभी नहीं रोका जाता..
सूत्र बताते हैं कि सरकारी निर्माण कार्यों के नाम पर रेत निकाली जाती है, लेकिन वही रेत खुले बाजार में बेची जा रही है.. वर्षों से चल रहे इस खेल की कभी गंभीर जांच नहीं हुई..
: प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ा सवाल
महान नदी की छाती छलनी हो रही है, पुल खतरे में है, रोज करोड़ों के राजस्व की चोरी हो रही है, लेकिन जिला प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है..
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा ?
क्या रेत माफियाओं पर कार्रवाई होगी या संरक्षण का खेल यूं ही चलता रहेगा ?
फिलहाल महान नदी में कानून नहीं, रेत माफियाओं का राज चलता दिखाई दे रहा है..