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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ जनपद पंचायत बलरामपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत भेलवाड़ीह के पंचायत सचिव का कथित ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर पंचायत सचिव जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन करने के एवज में पैसे की मांग करते सुनाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, ऑडियो में कथित रूप से यह भी कहा गया है कि “जिले में डेढ़ से दो सौ रुपये देना ही पड़ता है, नहीं तो दफ्तरों के चक्कर काटते रहिए।”
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ऑडियो की जांच के लिए अधिकारियों की टीम गांव तक पहुंची, बयान लिए गए, तथ्यों की पड़ताल हुई और सूत्रों के अनुसार कई महत्वपूर्ण बातें भी सामने आईं, तो फिर कार्रवाई की फाइल आखिर किस टेबल पर जाकर सो गई? या फिर किसी अदृश्य “संरक्षण कवच” ने पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया?
ग्रामीणों का आरोप है कि आज भी जन्म प्रमाण पत्र जैसे सामान्य दस्तावेज के लिए लोगों को बार-बार पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पंचायत में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि लोग खुलकर शिकायत करने से भी डर रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे अधिक पीड़ा उस शिकायतकर्ता की है, जिसकी मासूम बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र कई महीनों बाद भी ऑनलाइन नहीं हो पाया। परेशान होकर वह एक बार फिर जिला पंचायत सीईओ कार्यालय पहुंचा और ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की। उसका कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनने से बच्ची के शिक्षा सहित अन्य जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
अब सवाल सिर्फ एक पंचायत सचिव का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। यदि कथित रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल होने, शिकायत दर्ज होने और जांच होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती, तो आम आदमी यह माने कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करते हैं या फिर एक मासूम बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र भी सरकारी फाइलों में धूल फांकता रहेगा और “सुविधा शुल्क” का कथित सिस्टम यूं ही चलता रहेगा।