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• डीएमएफ का स्वाद इतना मीठा कि स्थगन आदेश भी बेअसर !
• रानू साहू डीएमएफ घोटाले की गूंज अभी थमी नहीं, इधर निजी भूमि पर डीएमएफ से बाउंड्रीवाल निर्माण का नया विवाद !
संजय गुप्ता/बलरामपुर@ एक समय प्रदेश की राजनीति में भूचाल लाने वाला बहुचर्चित डीएमएफ घोटाला अभी लोगों की स्मृति से धुंधला भी नहीं पड़ा है.. तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू के कार्यकाल में सामने आए कथित डीएमएफ घोटाले को लेकर जिस भाजपा ने प्रदेशभर में भ्रष्टाचार का बड़ा मुद्दा बनाया था, उसी डीएमएफ फंड को लेकर अब बलरामपुर जिले के राजपुर क्षेत्र में नया विवाद खड़ा हो गया है..
शासन द्वारा डीएमएफ राशि के उपयोग पर कड़े दिशा-निर्देश लागू किए जाने और खर्च के दायरे सीमित किए जाने के बावजूद राजपुर में कथित रूप से निजी भूमि पर डीएमएफ मद से बाउंड्रीवाल निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है.. आरोप है कि निर्माण कार्य को लेकर राजस्व न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश जारी किए जाने के बाद भी काम नहीं रोका गया, बल्कि उसे और अधिक गति से पूरा करने का प्रयास किया गया..

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि जिस निर्माण कार्य पर रोक लगाने का आदेश जारी हुआ, वह डीएमएफ मद से स्वीकृत बताया जा रहा है.. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कर उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) प्राप्त करने की जल्दबाजी में आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है.. यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल भूमि विवाद नहीं बल्कि शासन की राशि के उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करेगा..
इसी विवाद के बीच ग्राम करंजी निवासी मदन सिंह सामने आए, जिन्होंने दावा किया कि जिस भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण किया जा रहा है, वह उनके नाम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज निजी भूमि है.. उन्होंने तहसीलदार राजपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की.. शिकायत पर जांच कराए जाने के बाद तहसीलदार राजपुर ने 27 मई 2026 को स्थगन आदेश जारी करते हुए निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए.. आदेश में भी संबंधित खसरा नंबर 554/1 एवं 555 को निजी स्वामित्व की भूमि बताया गया है..
लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्थगन आदेश जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य बंद नहीं किया गया.. उलटे निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्य की गति बढ़ा दी गई तथा अधिक मजदूर लगाकर निर्माण को शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया गया.. शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत कलेक्टर से करते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है..