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डेस्क_अचूक प्रहार/नई दिल्ली@ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ने अंडमान अपतटीय (ऑफशोर) क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का दूसरा महत्वपूर्ण भंडार खोजने में सफलता हासिल की है। इस खोज ने अंडमान बेसिन को देश के उभरते हुए हाइड्रोकार्बन हब के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह नई खोज विजयपुरम-3 (Sri Vijayapuram-3) अन्वेषण कुएं में हुई है। यह कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर और 355 मीटर गहरे समुद्री क्षेत्र में स्थित है। मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र में OIL द्वारा खोदा गया दूसरा सफल गैस-युक्त कुआं है, जो अंडमान सागर की विशाल ऊर्जा क्षमता की पुष्टि करता है।
अंडमान बेसिन बन सकता है नया ऊर्जा केंद्र !
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार दूसरी गैस खोज इस बात का संकेत है कि अंडमान बेसिन में बड़े पैमाने पर हाइड्रोकार्बन भंडार मौजूद हो सकते हैं। यदि आगे के परीक्षण और मूल्यांकन सफल रहते हैं, तो यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत के प्रमुख तेल एवं गैस उत्पादन क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
आयात पर निर्भरता घटाने में मदद..
भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर गैस के नए भंडार मिलने से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है। केंद्र सरकार लंबे समय से घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए अपतटीय क्षेत्रों में खोज अभियान चला रही है, जिसमें अंडमान क्षेत्र को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
“ऊर्जा अवसरों का महासागर”
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस उपलब्धि को “ऊर्जा अवसरों के महासागर” की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि अंडमान सागर में लगातार मिल रही सफलताएं भारत की ऊर्जा खोज रणनीति को नई दिशा देंगी और देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में मदद करेंगी।
उत्पादन शुरू होने में लगेगा समय!
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गैस की खोज और व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बीच लंबी प्रक्रिया होती है। इसमें भंडार का आकलन, तकनीकी परीक्षण, पाइपलाइन और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। इसलिए इस खोज का वास्तविक आर्थिक लाभ मिलने में कुछ वर्ष लग सकते हैं।
प्रमुख तथ्य !
• अंडमान अपतटीय क्षेत्र में OIL की दूसरी सफल गैस खोज।
• विजयपुरम-3 कुआं पूर्वी तट से 15 किमी दूर स्थित।
समुद्र की गहराई लगभग 355 मीटर।
• अंडमान बेसिन के बड़े हाइड्रोकार्बन क्षेत्र बनने की संभावना मजबूत।
• भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि।
(समाचार डेस्क): लगातार दूसरी गैस खोज ने यह संकेत दे दिया है कि अंडमान सागर भारत के लिए भविष्य का बड़ा ऊर्जा केंद्र बन सकता है। यदि आगे की खोजें भी सफल रहीं, तो यह उपलब्धि देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है।