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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ की छत्तीसगढ़-उत्तरप्रदेश सीमा पर स्थित धनवार परिवहन चेक पोस्ट इन दिनों एक ऐसे कथित वसूली तंत्र के केंद्र में है, जिसने पूरे परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस “मैकेनिकल शुल्क” के नाम पर भारी वाहनों से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं, उसके अस्तित्व को ही परिवहन विभाग ने सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब में नकार दिया है।
यानी शासन का कोई आदेश नहीं… कोई वैधानिक प्रावधान नहीं… फिर भी हर दिन सैकड़ों वाहनों से हजारों रुपये की वसूली! आखिर यह रकम जा कहां रही है और किसके संरक्षण में यह खेल वर्षों से चल रहा है?

आरटीआई ने खोली पोल, विभाग खुद फंस गया सवालों के घेरे में
प्रतापपुर के आरटीआई कार्यकर्ता दीपक चंद मित्तल ने जब परिवहन विभाग से “मैकेनिकल शुल्क” वसूली संबंधी शासनादेश की प्रति मांगी तो विभाग का जवाब चौंकाने वाला था। विभाग ने साफ लिखा कि इस प्रकार का कोई आदेश छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी ही नहीं किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने ऐसा कोई शुल्क निर्धारित नहीं किया, तो धनवार बॉर्डर पर आखिर किस नियम-कानून के तहत यह रकम वसूली जा रही है?
रेट फिक्स, वाहन फिक्स… क्या जुर्माना भी पहले से तय है?
वाहन चालकों के मुताबिक धनवार चेक पोस्ट पर वसूली की पूरी “रेट लिस्ट” तय है—
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार…
- पिकअप वाहन – ₹1000
- 6 चक्का वाहन – ₹2000
- 10 चक्का वाहन – ₹2500
- 12 चक्का वाहन – ₹3000
- 14 एवं 16 चक्का वाहन – ₹4000
सवाल यह है कि क्या कानून में भी जुर्माने की राशि वाहन के चक्कों की संख्या देखकर तय होती है? या फिर यह कोई समानांतर व्यवस्था है जो विभागीय तंत्र के भीतर ही विकसित हो चुकी है?
रसीद एमव्ही एक्ट की, नाम मैकेनिकल शुल्क का!
वाहन चालकों का आरोप है कि उनसे “मैकेनिकल शुल्क” बताकर रकम ली जाती है, लेकिन रसीद मोटरयान अधिनियम की धारा 200 के तहत काटी जाती है। वहीं जो चालक रसीद नहीं चाहते, उनसे नकद राशि लेकर मामला वहीं समाप्त कर दिया जाता है।
यदि यह आरोप सही हैं तो मामला केवल अवैध वसूली का नहीं, बल्कि कानून के दुरुपयोग और राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
सभी दस्तावेज दुरुस्त, फिर किस अपराध की सजा?
व्यवसायिक वाहन संचालकों का कहना है कि उनके पास वैध परमिट, फिटनेस, बीमा, टैक्स, प्रदूषण प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस सहित सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद रहते हैं। वाहन भी निर्धारित भार सीमा के भीतर संचालित किए जाते हैं।
फिर आखिर ऐसा कौन सा अपराध है जिसके लिए हर गुजरते वाहन से एक जैसी राशि वसूली जा रही है?
क्या धनवार बॉर्डर से गुजरने वाला हर वाहन नियम तोड़ रहा है? यदि नहीं, तो यह वसूली किस आधार पर की जा रही है?
धारा 200 का ‘कैश काउंटर’ में रूपांतरण?
कानूनी जानकारों के अनुसार मोटरयान अधिनियम की धारा 200 का उपयोग केवल विशिष्ट उल्लंघनों पर चालानी कार्रवाई के लिए किया जा सकता है। लेकिन यदि बिना किसी स्पष्ट उल्लंघन के एक व्यवस्थित तरीके से वाहनों से राशि ली जा रही है, तो यह कानून की भावना और प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़े करता है।
करोड़ों की उगाही का अंदेशा, जांच की उठी मांग..
बनारस मार्ग पर स्थित धनवार बॉर्डर से प्रतिदिन सैकड़ों व्यवसायिक वाहन गुजरते हैं। यदि प्रत्येक वाहन से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं तो यह रकम प्रतिमाह लाखों नहीं बल्कि करोड़ों तक पहुंच सकती है।
अब परिवहन व्यवसायियों, वाहन संचालकों और स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और मुख्य सचिव से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—
जब शासन का आदेश ही नहीं, तो धनवार बॉर्डर पर वर्षों से चल रही यह वसूली आखिर किसके आदेश पर हो रही है?
और उससे भी बड़ा सवाल—
क्या यह केवल एक चेक पोस्ट का मामला है, या फिर परिवहन व्यवस्था के भीतर छिपे किसी बड़े खेल की झलक ?
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश का बॉर्डर धनवार आरटीओ चेक पोस्ट मोटी कमाई का अवैध अड्डा बनकर रह गया है