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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ जीवन में कुछ परिवर्तन ऐसे होते हैं जो केवल कार्यस्थल नहीं बदलते, बल्कि मन और भावनाओं की पूरी दुनिया को भी प्रभावित कर देते हैं। कोरिया जिले से स्थानांतरण के बाद बलरामपुर में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत के साथ अनेक व्यावहारिक चुनौतियाँ, अपनों से दूरी और भविष्य को लेकर स्वाभाविक चिंताएँ भी साथ आईं। ऐसे ही मनःस्थिति के बीच बाबा बछराज कुंवर धाम पहुंचकर पंचमुखी हनुमान महाप्रभु के दर्शन ने एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।
धाम में विराजमान पंचमुखी हनुमान महाप्रभु की दिव्य, तेजस्वी और करुणामयी प्रतिमा के दर्शन करते ही ऐसा महसूस हुआ मानो प्रभु स्वयं यह संदेश दे रहे हों—“चिंता मत करो, मैं हूँ।” इस दिव्य अनुभूति ने मन के भीतर चल रहे द्वंद्व, संशय और थकान को पलभर में शांत कर दिया। वर्षों बाद ऐसी आत्मिक शांति का अनुभव हुआ जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
दर्शन के दौरान भावनाएँ इतनी प्रबल हो गईं कि आँखें स्वतः नम हो उठीं। ऐसा प्रतीत हुआ मानो मन का समस्त बोझ प्रभु के श्रीचरणों में समर्पित हो गया हो और बदले में विश्वास, साहस तथा नई ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त हुआ हो। आस्था का यही स्वरूप जीवन की कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
बाबा बछराज कुंवर धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए विश्वास, आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन चुका है। यहाँ आने वाले अनेक भक्त अपने जीवन के संघर्षों के बीच नई आशा और आत्मविश्वास का अनुभव करते हैं।
इस अवसर पर पंचमुखी हनुमान महाप्रभु से समस्त विश्व के कल्याण की प्रार्थना की गई कि वे सभी के जीवन से भय, दुख और निराशा को दूर कर साहस, सेवा, सद्बुद्धि और सकारात्मक सोच का आशीर्वाद प्रदान करें।
“बेगी हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो।
कौन सों संकट है मो गरीब को,
जो तुमसे नहीं जात है टारो॥”
॥ ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट ॥
“जीवन में परिवर्तन केवल स्थान का नहीं होता, बल्कि वह मन और भावनाओं को भी गहराई से प्रभावित करता है। कोरिया जिले से स्थानांतरण के बाद बलरामपुर में नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए मन में अनेक भाव, चुनौतियाँ और अनिश्चितताएँ थीं। ऐसे समय में बाबा बछराज कुंवर धाम पहुंचकर पंचमुखी हनुमान महाप्रभु के दिव्य दर्शन ने एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हुई “