
![]()
संजय गुप्ता/कुसमी@ बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत कमलापुर गांव में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है.. जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उन्हें ईंट भट्ठे की धूल और मौत से भरे काम में झोंक दिया गया.. नतीजा—एक ट्रैक्टर पलटा और तीन मासूम बच्चे उसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए..
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई.. ग्रामीणों ने किसी तरह बच्चों को बाहर निकाला और कुसमी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से एक की हालत गंभीर होने पर उन्हें अंबिकापुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया.. बताया जा रहा है कि घायल बच्चे महज 11 से 12 साल की उम्र के हैं और ईंट भट्ठे में मजदूरी कर रहे थे..
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन की आंखों के सामने यह बालश्रम का खेल कब से चल रहा था? क्या श्रम विभाग को इन ईंट भट्ठों में काम करते मासूमों की कभी नहीं लगी? आखिर क्या कर रहा है श्रम विभाग?

जोखिम भरे कामों में बच्चों को झोंकना कानूनन अपराध है, लेकिन यहां नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं.. हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश है और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठने लगे हैं..
जानकार लोगों का कहना है कि अगर समय रहते बालश्रम के खिलाफ कार्रवाई हुई होती तो आज तीन मासूम अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की लड़ाई नहीं लड़ रहे होते.. सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम का है जिसने गरीबी और मजबूरी के नाम पर बच्चों का बचपन ईंट भट्ठों में जलने दिया..
सूत्रों के मुताबिक प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और ईंट भट्ठा संचालकों से पूछताछ की तैयारी चल रही है.. हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी प्रकार की ठोस पुलिस कार्रवाई या एफआईआर की पुष्टि नहीं हो सकी थी..
अब देखना यह होगा कि यह मामला भी कुछ दिनों की जांच और खानापूर्ति बनकर रह जाएगा या फिर सच में उन लोगों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने मासूम बच्चों को मजदूर बनाकर मौत के मुंह में धकेल दिया..




