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संजय गुप्ता/बलरामपुर@ किसानों की मेहनत से उपजा धान सुरक्षित रखने का दावा करने वाला प्रशासन एक बार फिर कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है.. रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम गम्हरिया स्थित धान संग्रहण केंद्र में हुई भारी बारिश ने सरकारी व्यवस्थाओं की ऐसी पोल खोली है, जिसे अब छिपाना मुश्किल दिखाई दे रहा है.. करोड़ों रुपये मूल्य का धान खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगता रहा और जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने रहे..
शुक्रवार को हुई तेज बारिश के दौरान गम्हरिया धान संग्रहण केंद्र में बड़ी संख्या में धान की बोरियां खुले में पड़ी रहीं.. वीडियो और तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि बारिश लगातार होती रही, लेकिन धान को बचाने के लिए न तो पर्याप्त तिरपाल का उपयोग किया गया और न ही कोई प्रभावी सुरक्षा इंतजाम नजर आया.. नतीजा यह हुआ कि हजारों बोरी धान पानी में भीग गईं और अब उनके खराब होने का खतरा मंडरा रहा है..

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन द्वारा धान की सुरक्षा के लिए तिरपाल और अन्य संसाधन पहले से उपलब्ध कराए गए थे, तो फिर यह नौबत आई ही क्यों? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मानसून की संभावना को गंभीरता से नहीं लिया? या फिर यह पूरा मामला घोर लापरवाही और उदासीनता का परिणाम है?
जानकारी के अनुसार संग्रहण केंद्र में अलग-अलग खरीदी केंद्रों से लगभग 6 लाख 22 हजार बोरी धान लाया गया था, जिनमें वर्तमान में 3 लाख 7 हजार 855 बोरी धान संग्रहित है.. करीब 1 लाख 29 हजार 753 क्विंटल धान का खुले में रखा होना अपने आप में व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.. इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी थी, लेकिन बारिश ने बता दिया कि जमीनी स्तर पर तैयारियां कितनी खोखली थीं..
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते तिरपाल ढंक दिए जाते और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाते तो धान को नुकसान से बचाया जा सकता था.. अब कई बोरियों में नमी पहुंच चुकी है और कुछ स्थानों पर फफूंद लगने की आशंका भी जताई जा रही है.. यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा नुकसान सरकारी खजाने को होगा, जिसकी भरपाई आखिर कौन करेगा?

घटना के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया है..

रामानुजगंज एसडीएम आनंद नेताम ने मामले की जांच के लिए टीम गठित करने और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है.. लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या फिर वास्तव में उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी जिनकी लापरवाही से हजारों क्विंटल धान बारिश में भीग गया?
किसानों का धान खरीद लेने भर से सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती.. उसकी सुरक्षित भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है.. गम्हरिया संग्रहण केंद्र की यह घटना केवल एक केंद्र की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है.. अब जनता यह जानना चाहती है कि लाखों रुपये की इस संभावित क्षति का जिम्मेदार कौन है और आखिर कब तक ऐसी लापरवाहियों पर केवल जांच का मरहम लगाया जाता रहेगा? अब देखना यह भी होगा कि इस मामले पर जिम्मेदार विभाग क्या रुख इख्तियार करता है ?